tussle between a self proclaimed mystic and a fate led marketeer
एक ओर से बनता,
एक ओर से बिखरता रहा हूँ मैं
जैसा था,
ताउम्र वैसा ही रहा हूँ मैं
बिखरे शब्द समेटकर
कविता रचने का सुकून
ठीक वैसा ही है
जैसा
तुम्हारी मुस्कान
निहारने में था